पाकिस्तान के जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर बड़ी राहत मिली है। पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इमरान खान को बेहतर चिकित्सा उपचार के लिए इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में भर्ती कराया जाए।
आंखों की रोशनी घटकर 15 प्रतिशत रह गई
अगस्त 2023 से तोशाखाना और अल-कादिर ट्रस्ट मामलों में अदियाला जेल में बंद इमरान खान की सेहत को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जा रही थी। जानकारी के मुताबिक जनवरी 2026 के अंत में उनकी दाईं आंख की नस में गंभीर ब्लॉकेज सामने आई थी, जिसके बाद परिवार और पार्टी नेताओं ने दावा किया कि समय पर उचित इलाज न मिलने से उनकी आंखों की रोशनी घटकर सिर्फ 15 प्रतिशत रह गई है।
सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा मामला
निचली अदालतों से राहत न मिलने के बाद इमरान खान, उनकी बहन और पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिका में मांग की गई थी कि सरकारी अस्पताल की बजाय उन्हें तुरंत शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में शिफ्ट किया जाए और निजी डॉक्टरों व परिवार को उनसे मिलने की इजाजत दी जाए। जेल प्रशासन और सरकार का कहना था कि उनका इलाज सरकारी अस्पताल PIMS के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है और उनकी स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन अदालत ने परिवार की चिंताओं को गंभीरता से लिया।
16 सितंबर तक अस्पताल में रहेंगे भर्ती
अदालत के आदेश के मुताबिक इमरान खान को 16 सितंबर तक अस्पताल में भर्ती रखा जाएगा, और इस दौरान परिजनों को उनसे साप्ताहिक मुलाकात की अनुमति भी दी गई है। PTI ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे पार्टी और इमरान खान के परिवार के लिए बड़ी राहत बताया है।
पाकिस्तान की सियासत में मौत की अटकलों का साया
इमरान खान की सेहत को लेकर पिछले कुछ समय से पाकिस्तान में तरह-तरह की अटकलें भी चलती रही हैं, जिनमें उनकी मौत तक की झूठी अफवाहें शामिल रही हैं। ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश परिवार और समर्थकों के लिए उनकी सेहत को लेकर पारदर्शिता का एक भरोसेमंद जरिया माना जा रहा है।
आगे क्या
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इमरान खान को कितनी जल्दी अदियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल अस्पताल शिफ्ट किया जाता है, और अस्पताल में उनके इलाज से जुड़ी आगे की जानकारी सामने आती है या नहीं। पाकिस्तान की राजनीति में यह मामला लगातार एक बड़ा भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।
अस्वीकरण: यह जानकारी उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, स्थिति आगे बदल सकती है।



