पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील (एलपीए) को पूरी तरह खारिज करते हुए सरकार को निर्देश दिया है कि वह करीब 6 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) जल्द से जल्द जारी करे।
क्या कहता है अदालत का आदेश
अदालत ने अपने 76 पेज के विस्तृत फैसले में साफ कहा है कि राज्य सरकार के पास पात्र कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया पैसा रोकने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह तय समय सीमा के भीतर सारा बकाया चुकाए। अगर इस अवधि में भुगतान नहीं होता, तो सरकार को बकाया राशि पर सालाना 6 प्रतिशत साधारण ब्याज भी देना होगा।
गैर-जरूरी खर्चों पर भी लगाई रोक
अदालत ने एक और अहम निर्देश में कहा है कि जब तक DA-DR का सारा बकाया नहीं चुका दिया जाता, तब तक राज्य सरकार को प्रिंट और सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान जैसे गैर-जरूरी खर्चों से बचना चाहिए। कोर्ट का मानना है कि ऐसे खर्च तब तक उचित नहीं ठहराए जा सकते जब तक कर्मचारियों के वैध बकाया अधिकारों का निपटारा नहीं हो जाता।
2023 से अटका था भुगतान
रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्मचारी 2023 से महंगाई भत्ते के बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे थे, और इस दौरान पंजाब सरकार की ओर से याचिकाकर्ताओं की मांग का लगातार विरोध किया जाता रहा। अनुमान है कि लंबित डीए और एरियर का कुल बकाया करीब 14,000 करोड़ रुपये है, जो राज्य के खजाने के लिए भी एक बड़ी राशि है।
कर्मचारियों की सैलरी पर कितना असर
इस फैसले के बाद अनुमान है कि प्रभावित कर्मचारियों की सैलरी में 15,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि बकाया डीए-डीआर की राशि उनके मासिक वेतन ढांचे का हिस्सा बनकर जुड़ेगी। कर्मचारी संगठनों और पेंशनर एसोसिएशनों ने इस फैसले को एक बड़ी जीत बताया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू
फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल शुरू हो गई है। शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को आने वाले समय में और मजबूती से उठाएंगे, जिससे यह मामला आगे राजनीतिक बहस का विषय भी बन सकता है।
आगे क्या होगा
अब पंजाब सरकार के सामने सीधी चुनौती है कि वह अदालत के आदेश का पालन करते हुए तय समय सीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित करे। अगर सरकार तय अवधि में बकाया नहीं चुकाती, तो न सिर्फ उसे ब्याज सहित बड़ी राशि देनी होगी, बल्कि अवमानना जैसी कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। कर्मचारी संगठन अब चीफ सेक्रेटरी की अनुपालन रिपोर्ट पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।


