भारतीय वायुसेना को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। फ्रांस ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील के लिए भारत को अपना औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है। सबसे खास बात यह है कि इनमें से 94 विमान भारत में ही एक भारतीय औद्योगिक भागीदार के साथ मिलकर बनाए जाएंगे, जो मेक इन इंडिया पहल को नई ऊंचाई दे सकता है।
कैसे शुरू हुई यह डील
भारत सरकार ने इसी साल मई महीने में गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट खरीद मार्ग के तहत फ्रांस को एक अनुरोध पत्र (लेटर ऑफ रिक्वेस्ट) भेजा था। इसी के जवाब में अब फ्रांस ने अपना विस्तृत प्रस्ताव पेश किया है। यह सौदा करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये का आंका जा रहा है, जो भारत के अब तक के सबसे बड़े रक्षा सौदों में गिना जाएगा।
22-24 विमान सीधे फ्रांस से, बाकी भारत में
प्रस्ताव के मुताबिक वायुसेना की आपातकालीन जरूरतों को देखते हुए शुरुआती 22 से 24 राफेल विमान डसॉल्ट एविएशन की मैरिनेक फैक्ट्री से पूरी तरह तैयार हालत में सीधे भारत लाए जाएंगे। बाकी बचे 90 से 94 विमानों का निर्माण भारतीय धरती पर एक स्थानीय औद्योगिक साझेदार के सहयोग से किया जाएगा।
पिछली डील से कितना अलग है यह सौदा
गौरतलब है कि इससे पहले भारत ने 2016 में 36 राफेल विमानों की डील की थी, जिसमें सभी विमान फ्रांस से पूरी तरह तैयार हालत (फ्लाई-अवे कंडीशन) में खरीदे गए थे। इस बार सरकार की प्राथमिकता साफ तौर पर बदल गई है—अब जोर रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर है, ताकि भविष्य में भारत खुद बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमान बना सके।
स्वदेशी हथियारों को जोड़ने की योजना
भारत की योजना इन राफेल विमानों में स्वदेशी रूप से विकसित ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल जैसे हथियार लगाने की भी है। रक्षा विशेषज्ञ और वायुसेना अधिकारी फ्रांसीसी प्रस्ताव में दिए गए इस प्रावधान का बारीकी से आकलन कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारतीय हथियार प्रणालियां राफेल के साथ पूरी तरह अनुकूल हों।
क्यों अहम है यह सौदा
भारतीय वायुसेना लंबे समय से लड़ाकू विमानों की कमी का सामना कर रही है, और स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन के मुकाबले मौजूदा संख्या इससे काफी कम है। ऐसे में 114 नए राफेल जेट्स मिलने से वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा। साथ ही बड़े पैमाने पर घरेलू निर्माण से एयरोस्पेस क्षेत्र में हजारों कुशल रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
आगे की प्रक्रिया
अब भारतीय रक्षा मंत्रालय फ्रांसीसी प्रस्ताव का विस्तृत तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन करेगा, जिसके बाद बातचीत का अगला दौर शुरू होगा। रक्षा जानकारों का मानना है कि इस मेगा डील को अंतिम रूप मिलने में अभी कुछ महीनों से लेकर एक साल तक का समय लग सकता है, लेकिन इससे भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को एक नया आयाम जरूर मिलेगा।



