उत्तराखंड के चमोली जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग एक बार फिर पूरी तरह बंद हो गया है। पागल नाला के पास पहाड़ी से भारी मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गिरने से सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई, जिससे दर्जनों वाहन बीच रास्ते में फंस गए।
रातभर की बारिश के बाद बिगड़े हालात
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक रातभर हुई तेज बारिश के बाद अचानक पहाड़ी से मलबा और बोल्डर नीचे आ गए, जिससे NH-7 पर आवाजाही पूरी तरह रोकनी पड़ी। यह 373 किलोमीटर लंबा पहाड़ी मार्ग ऋषिकेश और जोशीमठ को बद्रीनाथ धाम और माणा पास से जोड़ता है, और मानसून के दौरान यहां अक्सर मलबा आने से रास्ता बाधित होता रहता है।
यमुनोत्री हाईवे और अन्य मार्ग भी प्रभावित
सिर्फ बद्रीनाथ हाईवे ही नहीं, बल्कि उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जिलों में भी भूस्खलन और मलबा आने से यमुनोत्री हाईवे पर आवाजाही बाधित हुई है। इसके अलावा हेलंग में भूस्खलन से बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और आमसौड में भूस्खलन के कारण नारायणबगड़-कर्णप्रयाग मुख्य सड़क मार्ग भी पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को परेशानी
रास्ता बंद होने से बद्रीनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई वाहन घंटों तक एक ही जगह खड़े रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि जब तक मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक वे यात्रा के लिए धैर्य बनाए रखें और अनावश्यक जोखिम न उठाएं।
प्रशासन की बहाली की कोशिशें
राज्य प्रशासन और सड़क निर्माण विभाग की टीमें मलबा हटाने के काम में युद्ध स्तर पर जुटी हैं। हालांकि लगातार हो रही बारिश की वजह से पहाड़ों से पत्थर गिरने का सिलसिला थम नहीं रहा, जिससे मार्ग बहाली में बार-बार बाधा आ रही है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक देहरादून, चमोली और बागेश्वर जैसे जिलों में आज भी भारी बारिश और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका जताई गई है।
पहाड़ी सुरक्षा पर उठते सवाल
इस तरह की बार-बार होने वाली भूस्खलन घटनाओं ने एक बार फिर चारधाम यात्रा मार्ग की सुरक्षा और पहाड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों में स्थायी समाधान के लिए बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और ढलान सुरक्षा उपायों में निवेश बढ़ाने की जरूरत है, ताकि हर मानसून में यात्रियों को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।
अस्वीकरण: सड़क और मौसम की स्थिति लगातार बदल सकती है, यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन से ताजा अपडेट जरूर लें।


