मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। रेड सी और फारस की खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने की आशंका से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई है।
क्यों बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी के चलते ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे निवेशकों में घबराहट का माहौल है और तेल कारोबार में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है।
भारत पर असर
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे में बढ़ती कीमतें आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बना सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और रुपये की चाल पर भी पड़ सकता है।
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