दुनिया के सबसे रणनीतिक और संवेदनशील समुद्री मार्गों में गिने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव भड़क उठा है। ब्रिटेन के समुद्री सुरक्षा संगठन UKMTO (यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस) ने पुष्टि की है कि ओमान के तट के पास एक कार्गो जहाज पर “अज्ञात प्रोजेक्टाइल” से हमला हुआ है। यह घटना ओमान के अल खसाब से करीब 20 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई, जो सीधे मुख्य शिपिंग लेन के करीब पड़ता है।
कैसे हुआ हमला, अभी क्या पता है
UKMTO के मुताबिक जहाज पर हमले की सूचना मिलते ही क्षेत्र में गश्त लगा रहे नौसैनिक बलों को सतर्क कर दिया गया। फिलहाल यह साफ नहीं है कि हमला किसने किया, हमले में इस्तेमाल हथियार किस तरह का था, या जहाज को कितना नुकसान पहुंचा। हालांकि इस तरह की घटनाएं इस इलाके में पहले भी होती रही हैं, और आमतौर पर इन्हें क्षेत्रीय सैन्य टकराव और मिलिशिया गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता है।
क्यों इतना अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जिससे होकर वैश्विक कच्चे तेल का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है। सऊदी अरब, कुवैत, इराक, यूएई और कतर जैसे बड़े तेल निर्यातक देशों का अधिकतर तेल इसी रास्ते से टैंकरों में लदकर दुनियाभर के बाजारों तक पहुंचता है। यही वजह है कि इस जलमार्ग में जरा सी भी अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा देती है।
ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी
इस हमले से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त लहजा अपनाया। उन्होंने कहा कि परमाणु वार्ता को लेकर यह ईरान के लिए “समझौते का आखिरी मौका” है। ट्रंप ने ईरान पर बातचीत में दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब सिर्फ दो ही रास्ते बचे हैं—या तो डील हो या फिर पूर्ण समर्पण। उनका यह बयान पहले से तनावपूर्ण माहौल में और गर्मी घोल गया है।
तेल बाजार पर पहले ही दिख चुका है असर
दिलचस्प बात यह है कि बीते हफ्ते जब ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमले को टालने का संकेत दिया था, तब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई थी और भारतीय शेयर बाजार में भी तेजी लौटी थी। सेंसेक्स उस दिन 700 अंकों तक उछला था। लेकिन अब कार्गो जहाज पर हुए इस ताजा हमले के बाद बाजार एक बार फिर सतर्क निगाहों से स्थिति पर नजर रख रहा है, क्योंकि तनाव के फिर से भड़कने से तेल कीमतों में उलटफेर हो सकता है।
भारत के लिए क्यों मायने रखती है यह घटना
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, और यह आयात ज्यादातर होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य या आतंकी गतिविधि सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित कर सकती है। भारतीय विदेश मंत्रालय पहले भी क्षेत्र में शांति बहाली की अपील कर चुका है।
आगे क्या हो सकता है
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में ऐसी और घटनाएं होती हैं, तो बड़ी शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों के रूट बदलने या बीमा प्रीमियम बढ़ाने जैसे कदम उठा सकती हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक व्यापार लागत पर पड़ेगा। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे किस दिशा में जाती है, और क्या ट्रंप की चेतावनी के बाद तेहरान बातचीत की मेज पर लौटता है या तनाव और बढ़ता है।
अस्वीकरण: यह एक विकसित हो रही अंतरराष्ट्रीय घटना है, नवीनतम जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर बनाए रखें।




