UPI MDR विवाद: निर्मला सीतारमण ने साफ किया, ग्राहकों पर नहीं लगेगा चार्ज

UPI QR कोड पेमेंट, MDR विवाद

UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने की अफवाहों को लेकर देशभर में हड़कंप मचने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद स्थिति साफ की है। उन्होंने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के दावों पर पलटवार करते हुए कहा कि आम ग्राहकों से UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा।

कहां से शुरू हुआ विवाद

वित्त मंत्रालय ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 पेश किया, जिसके तहत बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने से रोकने वाले मौजूदा प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव है। बिल पेश होते ही विपक्ष ने सरकार पर UPI को महंगा करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया।

कांग्रेस के आरोप और सरकार का जवाब

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि सरकार सभी UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ कर रही है। इस पर वित्त मंत्री सीतारमण ने सोशल मीडिया पर सीधा जवाब देते हुए कहा कि गलत जानकारी फैलाने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि प्रस्तावित MDR सिर्फ व्यापारियों पर लागू होगा, आम ग्राहकों पर नहीं।

किन लेनदेन पर पड़ सकता है असर

रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर भविष्य में MDR लागू भी किया जाता है, तो इसका दायरा सिर्फ 2,000 रुपये से ज्यादा के हाई-वैल्यू बिजनेस ट्रांजैक्शन्स तक सीमित रह सकता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन कुल UPI लेनदेन की संख्या का सिर्फ करीब 5 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में उनकी हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि ज्यादातर रोजमर्रा के छोटे UPI लेनदेन पर इसका कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है।

RBI गवर्नर का बयान

इस पूरे विवाद पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर ने भी सफाई दी है और कहा कि इस मुद्दे पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने लोगों से घबराने की बजाय आधिकारिक घोषणा का इंतजार करने की सलाह दी, क्योंकि नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

व्यापारियों के लिए क्या मायने

अगर MDR लागू होता है, तो इसका सीधा असर बड़े कारोबारियों और व्यापारियों पर पड़ेगा, जो हाई-वैल्यू डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते हैं। हालांकि यह भी जरूरी नहीं कि व्यापारी इस अतिरिक्त शुल्क का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालें, क्योंकि प्रतिस्पर्धी बाजार में ऐसा करना उनके लिए नुकसानदेह भी हो सकता है।

आगे क्या

फिलहाल यह बिल संसद में विचाराधीन है, और अंतिम नियम बनने में अभी समय लग सकता है। सरकार और RBI दोनों ने भरोसा दिलाया है कि आम उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला लिया जाएगा, जिससे रोजमर्रा के UPI इस्तेमाल पर किसी तरह का बोझ न पड़े।

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