क्या हुआ:
पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए ‘टैंकर के बदले टैंकर’ नीति अपनाई है। इसके तहत अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हो रहे ईरानी हमलों को रोकने के मकसद से ईरान पर व्यापक हवाई और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं, जिससे स्थिति बेहद गंभीर होती जा रही है।
रणनीति के पीछे का मकसद:
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य ईरान की उन रडार और मिसाइल क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट करना है, जिनका इस्तेमाल करके ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को निशाना बना रहा था। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार गलियारों में से एक माना जाता है, जहां से रोजाना बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है।
100 से अधिक ठिकानों पर हमले:
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने इस अभियान के तहत ईरान के 100 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में मुख्य रूप से रडार सिस्टम, मिसाइल लॉन्चिंग पैड और नौसैनिक अड्डों को टारगेट किया गया है। अमेरिका का मानना है कि इन ठिकानों को नष्ट करने से ईरान की जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला करने की क्षमता काफी हद तक कमजोर हो जाएगी।
ईरान की जवाबी कार्रवाई:
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी चुप बैठने के बजाय खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका देश ‘आंख के बदले आंख’ की नीति अपनाएगा और किसी भी हमले या बुनियादी ढांचे पर हुए हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
ट्रंप की सख्त चेतावनी:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने जलडमरूमध्य में किसी भी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट या ड्रोन से हमला किया, तो अमेरिका जवाब में किसी बड़े पुल या पावर प्लांट को तबाह कर देगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह कार्रवाई तेहरान की राजधानी में भी हो सकती है, जिससे तनाव और भी गंभीर हो गया है।
तेल टैंकरों की सुरक्षित निकासी:
दिलचस्प बात यह है कि तमाम तनाव के बीच अमेरिका ने एक गुप्त रणनीति के तहत हर रात दर्जनों तेल टैंकरों को ईरानी सेना की नजरों से बचाकर सुरक्षित रास्ते से बाहर निकाला है। अमेरिकी प्रशासन ने इसे अपनी बड़ी रणनीतिक कामयाबी बताया है। कुछ खास रातों में तो यह तेल निकासी 1.5 से 2 करोड़ बैरल तक पहुंच चुकी है।
कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह ठप:
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और कूटनीतिक मोर्चे पर तनाव अपने चरम पर है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा हालात में ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत समय की बर्बादी होगी। इससे साफ है कि आने वाले समय में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ने की आशंका है।
वैश्विक तेल बाजार पर असर:
होर्मुज जलडमरूमध्य से हर रात 15 से 20 तेल टैंकर गुजरते हैं, इसलिए इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस घटनाक्रम को लेकर पहले से ही चिंता की लहर देखी जा रही है, क्योंकि तेल आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
भारत के लिए क्या मायने रखता है:
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह घटनाक्रम खासा महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की एक बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति इसी क्षेत्र से होकर गुजरती है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर भारत में तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिसे लेकर भारतीय अधिकारी भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता:
संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। हालांकि फिलहाल जमीनी स्तर पर स्थिति में किसी सुधार के संकेत नहीं दिख रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है:
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में एक बड़े संघर्ष का खतरा पैदा हो सकता है। दोनों पक्षों की तरफ से दिखाई जा रही आक्रामकता को देखते हुए निकट भविष्य में किसी शांतिपूर्ण समाधान की संभावना कम ही नजर आ रही है।
निष्कर्ष:
ईरान-अमेरिका के बीच यह बढ़ता तनाव न सिर्फ पश्चिम एशिया, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। ‘टैंकर के बदले टैंकर’ रणनीति ने इस टकराव को एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है, जिसके वैश्विक स्तर पर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।


