बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-4 मिशन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद यह मिशन अगले साल की शुरुआत में लॉन्च होगा और इसका मुख्य उद्देश्य चांद की सतह से नमूने वापस पृथ्वी पर लाना है, जो अब तक किसी भी भारतीय ग्रहीय मिशन ने नहीं किया है।
चंद्रयान-4 क्या करेगा
मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास एक चयनित स्थान पर उतरेगा। लगभग 3 किलोग्राम चांद की मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र किए जाएंगे और पृथ्वी पर लाकर विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए भेजे जाएंगे। इससे चांद की सतह की संरचना, खनिज तत्वों की मौजूदगी और संभावित जल-बर्फ के भंडारों के बारे में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।
तकनीकी चुनौतियां
नमूनों को पृथ्वी पर सुरक्षित रूप से वापस लाना इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। इसके लिए ISRO ने डॉकिंग और कैप्चर तकनीक पर खास ध्यान दिया है, जिसे पहले कई चरणों में स्वदेशी आर्बिटल मिशनों के जरिए परीक्षण किया जाएगा।
वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत का कद
चंद्रयान-3 की सफलता के बाद से भारत ग्रहीय अन्वेषण में एक भरोसेमंद नाम बनकर उभरा है। चंद्रयान-4 सफल होने पर भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने चंद्रमा से सैंपल वापस लाने में सफलता पाई है।




