देश में लाखों WhatsApp यूजर्स सोमवार को उस वक्त परेशान हो गए जब उनके अकाउंट अचानक “अंडर रिव्यू” दिखाने लगे और कई घंटों तक मैसेज भेजना-पाना बंद हो गया। स्क्रीन पर “Account in review. Date requested: 3 Aug 2026” जैसा मैसेज देखकर यूजर्स के बीच हड़कंप मच गया, क्योंकि रोजमर्रा की निजी और कारोबारी बातचीत के लिए ज्यादातर लोग इसी ऐप पर निर्भर हैं।
मेटा ने क्या सफाई दी
मामला सामने आने के बाद मेटा के प्रवक्ता ने माना कि यह कंपनी के ऑटोमेटेड बैन सिस्टम की वजह से हुआ। प्रवक्ता के मुताबिक WhatsApp स्पैम, स्कैम नेटवर्क और नीति उल्लंघन का पता लगाने के लिए लगातार सुरक्षा फिल्टर चलाता है, लेकिन कभी-कभी यह सिस्टम गलती से असली और वैध खातों को भी संदिग्ध मान लेता है, जिसे “फॉल्स पॉजिटिव” कहा जाता है। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि प्रभावित खातों की समीक्षा तेजी से की जा रही है और उन्हें जल्द बहाल कर दिया जाएगा।
यह अकेली घटना नहीं है
भारत में WhatsApp हर महीने लाखों अकाउंट बैन करता है। कंपनी की मासिक यूजर सेफ्टी रिपोर्ट के मुताबिक, बीते सालों में हर महीने औसतन 70 से 80 लाख भारतीय अकाउंट बैन किए जाते रहे हैं, जिनमें से बड़ा हिस्सा बिना किसी यूजर शिकायत के, सिर्फ कंपनी के अपने मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए पकड़ा जाता है। हालांकि इस बार दिक्कत यह रही कि बड़ी संख्या में सामान्य, निर्दोष यूजर्स भी इस दायरे में आ गए।
डिजिटल अरेस्ट और फ्रॉड से जुड़ा है बड़ा कनेक्शन
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत सरकार पहले ही WhatsApp पर सख्ती बरत रही है। हाल ही में केंद्र सरकार ने कंपनी के ग्लोबल यूजरनेम फीचर के रोलआउट को भारत में रोकने के लिए कहा था, क्योंकि सरकार को आशंका है कि फोन नंबर छिपाकर बनाए गए ऐसे यूजरनेम-आधारित खाते डिजिटल अरेस्ट और पहचान की चोरी जैसे साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। सरकार ने इसी तरह के सवाल टेलीग्राम और सिग्नल से भी पूछे थे। जाहिर है, मेटा अब भारत में खातों की जांच को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सतर्क रुख अपना रहा है, जिसका एक नतीजा यह मौजूदा गड़बड़ी भी हो सकती है।
प्रभावित यूजर्स क्या करें
अगर आपका अकाउंट भी “अंडर रिव्यू” दिखा रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। WhatsApp ऐप के भीतर ही रिव्यू रिक्वेस्ट भेजने का विकल्प मौजूद है, जिसके जरिए यूजर सीधे कंपनी से अपने खाते की समीक्षा तेज करने का अनुरोध कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि ज्यादातर मामलों में गलती से रोके गए खाते 24 घंटे के भीतर बहाल हो जाते हैं।
आगे क्या
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे सरकार साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों पर सख्ती बढ़ाएगी, वैसे-वैसे WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स को अपने ऑटोमेटेड सिस्टम को और भी बेहतर बनाना होगा, ताकि असली यूजर्स गलती से प्रभावित न हों। फिलहाल कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि इस घटना से सबक लेते हुए सिस्टम को और सटीक बनाने पर काम किया जाएगा।




