नई कार या बाइक खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए जरूरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए इसकी अनिवार्य अवधि बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्देश दिया है। इस फैसले का सीधा असर नए वाहनों की शुरुआती ऑन-रोड कीमत पर पड़ेगा।
क्या है नया नियम
अदालत के निर्देश के मुताबिक अब नई कार खरीदने पर ग्राहकों को 4 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस एक साथ लेना अनिवार्य होगा, जबकि नए दोपहिया वाहनों के लिए यह अवधि बढ़ाकर 6 साल कर दी गई है। इससे पहले 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत यह अवधि कारों के लिए 3 साल और दोपहिया वाहनों के लिए 5 साल थी।
कीमतों पर कितना पड़ेगा असर
चूंकि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का पूरा प्रीमियम शोरूम से गाड़ी खरीदते समय ही अग्रिम रूप से वसूला जाता है, इसलिए बढ़ी हुई अवधि का सीधा मतलब है कि ग्राहकों को शुरुआत में ही ज्यादा रकम चुकानी होगी। उदाहरण के तौर पर, टाटा टियागो के बेस मॉडल का मौजूदा इंश्योरेंस प्रीमियम करीब 30,000 रुपये है, जिसमें एक साल का कॉम्प्रिहेंसिव और तीन साल का थर्ड पार्टी कवर शामिल है। नई व्यवस्था लागू होने पर इस तरह के मॉडलों की शुरुआती कीमत में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
अदालत ने क्यों लिया यह फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आठ साल पहले 2018 में जारी किए गए निर्देश के बावजूद देश में बड़ी संख्या में वाहन अब भी बिना वैध इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर उचित मुआवजा दिलाने और बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या घटाने के मकसद से अदालत ने अनिवार्य अवधि बढ़ाने का फैसला किया।
बीमा नियामक की आपत्ति के बावजूद फैसला
दिलचस्प बात यह है कि इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और पीड़ितों के हितों को प्राथमिकता देते हुए अपना आदेश जारी किया।
तकनीक आधारित निगरानी भी होगी सख्त
अदालत ने सिर्फ इंश्योरेंस अवधि बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहते हुए बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान के लिए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने और ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं, ताकि सड़कों पर बिना बीमा दौड़ रहे वाहनों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
ग्राहकों के लिए सलाह
वाहन विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों के प्रीमियम में अंतर हो सकता है, इसलिए नई गाड़ी खरीदने से पहले ग्राहकों को अलग-अलग बीमा कंपनियों के प्रीमियम की तुलना जरूर करनी चाहिए। इससे बढ़ी हुई अनिवार्य अवधि के बावजूद बेहतर डील मिलने की संभावना बढ़ जाती है।



