तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। DMK प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी सांसदों की एक अहम बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें परिसीमन बिल को लेकर पार्टी का रुख साफ करने के साथ-साथ कांग्रेस से दूरी बनाने के निर्देश भी दिए गए।
परिसीमन बिल पर DMK का रुख
बैठक में यह तय किया गया कि DMK मौजूदा स्वरूप में परिसीमन बिल का विरोध जारी रखेगी, जो आबादी के आधार पर सीटों के पुनर्गठन और महिला आरक्षण से जुड़ा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक DMK नए बिल के प्रारूप का इंतजार करेगी और उसमें दी गई सिफारिशों के आधार पर ही अपना अंतिम फैसला लेगी। गौरतलब है कि कांग्रेस ने भी पहले ही परिसीमन बिल का विरोध करने की बात कही है, हालांकि दोनों दलों का इस मुद्दे पर नजरिया अलग-अलग राजनीतिक आधार पर टिका है।
कांग्रेस से दूरी क्यों
स्टालिन ने पार्टी सांसदों को निर्देश दिया कि वे कांग्रेस से दूरी बनाकर रखें। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उन सीटों पर जीत हासिल की जो DMK की मदद से मिली थीं, लेकिन सत्ता के लालच में कांग्रेस ने DMK को धोखा दिया। यह बयान दोनों सहयोगी दलों के बीच बढ़ती दूरी को साफ तौर पर दिखाता है, जो दशकों से गठबंधन में साथ रहे हैं।
कावेरी जल विवाद पर भी सख्त रुख
इसी बैठक में DMK ने कर्नाटक सरकार पर कावेरी नदी में तमिलनाडु का हिस्सा छोड़ने से इनकार करने का आरोप लगाते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। पार्टी ने कहा कि इसी वजह से मेट्टूर बांध खोलने में देरी हुई, जिससे किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। DMK ने कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदाटु बांध का विरोध भी दोहराया।
राहुल गांधी की पहले की चेतावनी
इससे पहले जब यह चर्चा जोर पकड़ी थी कि DMK परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार का समर्थन कर सकती है, तो विपक्षी खेमे में बेचैनी बढ़ गई थी। तमिलनाडु दौरे पर गए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तब सार्वजनिक तौर पर आगाह किया था कि राज्य की सभी पार्टियों को इस बिल का डटकर विरोध करना चाहिए, और जो दल इसका समर्थन करेगा, इतिहास उसे याद रखेगा।
आगे की सियासी दिशा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के साथ दशकों पुराने गठबंधन में आई इस दरार का असर आने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। पार्टी नेता उदयनिधि स्टालिन ने भी हाल ही में स्पष्ट किया कि DMK केंद्र के परिसीमन प्रस्ताव का विरोध जारी रखेगी, जिससे इस मुद्दे पर पार्टी की स्थिति और भी स्पष्ट हो गई है। आने वाले संसद सत्र में यह मुद्दा एक बार फिर बड़ी बहस का केंद्र बन सकता है।

