झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन को बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा समेत निजी कंपनी TDPL द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया, जिसके बाद 16 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सोमवार को अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
16 दिन बाद टूटा अनशन
देवेंद्र महतो पिछले 16 दिनों से भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठे थे। सरकार के फैसले की घोषणा होते ही हेमंत सोरेन सरकार के मंत्रियों ने खुद मौके पर पहुंचकर उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। महतो ने इस फैसले को छात्रों की “बड़ी जीत” करार दिया।
क्यों जरूरी थी यह परीक्षा रद्द करने की मांग
झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर लंबे समय से पेपर लीक के आरोप लग रहे थे। सरकारी विभागों में 2,025 पदों पर नियुक्ति के लिए इस परीक्षा में करीब 6.5 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिससे यह मामला लाखों युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ था। हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में इस मामले की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई गई थी, जिस पर मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी।
देवेंद्र महतो ने हेमंत सोरेन और राहुल गांधी दोनों का जताया आभार
दिलचस्प बात यह है कि अनशन खत्म करने के बाद देवेंद्र महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ-साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी आभार जताया, जिससे इस आंदोलन को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मिले व्यापक राजनीतिक समर्थन की झलक मिलती है। छात्रों के इस आंदोलन को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला, जिन्होंने छात्रों और मुख्यमंत्री दोनों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने समय रहते छात्रों की जायज मांगें मान लीं।
छात्रों की आगे की मांग
परीक्षा रद्द होने के बाद भी देवेंद्र महतो ने आंदोलन को पूरी तरह विराम नहीं दिया है। उन्होंने विधानसभा से एक ऐसा सख्त कानून बनाने की मांग की है, जिससे भविष्य में कोई भी छात्र परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक का शिकार होकर न ठगा जाए। उन्होंने कहा कि छात्र जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे और भ्रष्ट व्यवस्था को जड़ से खत्म करने की मुहिम में सरकार का साथ देना जारी रखेंगे।
झारखंड की छात्र राजनीति में बड़ा असर
यह आंदोलन झारखंड में परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर एक बड़े जनआंदोलन के तौर पर उभरा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह फैसला आने वाले समय में राज्य में परीक्षा सुधारों को लेकर एक मिसाल बन सकता है, और अन्य राज्यों के छात्र संगठन भी इससे प्रेरणा ले सकते हैं।
आगे की राह
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि झारखंड सरकार भर्ती परीक्षाओं को लेकर वादा किया गया सख्त कानून कितनी जल्दी और किस रूप में लाती है। छात्र संगठनों ने साफ किया है कि वे इस प्रक्रिया पर करीबी नजर बनाए रखेंगे, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रणाली में इस तरह की गड़बड़ियां दोबारा न हों।

