E20 पेट्रोल पर बड़ा विवाद: केजरीवाल के दावे, सरकार-कंपनियों का पलटवार

E20 पेट्रोल विवाद, पेट्रोल पंप पर गाड़ी भरते हुए

देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल लगातार इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों दोनों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार और कंपनियां उनके दावों को खारिज करती आ रही हैं।

केजरीवाल का दावा: 30 करोड़ वाहन खतरे में

केजरीवाल का कहना है कि देश में करीब 22 करोड़ मोटरसाइकिल और 8 करोड़ कारें ऐसी हैं जो E20 ईंधन के लिए डिजाइन नहीं की गई हैं। उनके मुताबिक इस तरह करीब 30 करोड़ वाहन मालिकों को नुकसान झेलना पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर E0, E10 और E20 तीनों विकल्प उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उपभोक्ता अपनी गाड़ी की क्षमता के हिसाब से ईंधन चुन सकें।

वाहन मालिकों की शिकायतें

केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंसों में कई वाहन मालिक सामने आए, जिन्होंने माइलेज में भारी गिरावट की शिकायत की। कुछ का कहना था कि उनकी गाड़ियों का माइलेज 40 से घटकर 32 और 45 से घटकर 35 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया, यानी सीधे 20 से 25 प्रतिशत का नुकसान। एक मामले में तो 2017 मॉडल की एक कार को क्रेन से बंधवाकर लाना पड़ा क्योंकि वह हर 500 मीटर पर बंद हो रही थी।

29 कंपनियों को लिखे पत्र का दावा

केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने देश की 29 प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर पूछा था कि क्या 2023 से पहले बने वाहनों में E20 का इस्तेमाल सुरक्षित है, लेकिन ज्यादातर कंपनियों ने लिखित जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे केंद्र सरकार के दबाव का नतीजा बताया।

सरकार और कंपनियों का पक्ष

दूसरी ओर, सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वाहनों को नुकसान के दावों को एक “पेड कैंपेन” (प्रायोजित अभियान) करार दिया है। कंपनियों का कहना है कि उनके ज्यादातर मौजूदा मॉडल E20 के अनुकूल हैं, और यह ईंधन सुरक्षित है।

E20 नीति के पीछे का मकसद

सरकार का तर्क है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है, विदेशी मुद्रा की बचत होती है और किसानों को गन्ने व अनाज से एथेनॉल उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय मिलती है। यह नीति देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के मकसद से लाई गई थी।

उपभोक्ताओं के लिए क्या करें

विवाद के बीच आम वाहन मालिकों के लिए सबसे बेहतर सलाह यही है कि वे अपनी गाड़ी की ओनर मैनुअल जरूर जांचें, जिसमें निर्माता कंपनी ने ईंधन की अनुकूलता से जुड़ी जानकारी दी होती है। अगर किसी वाहन में असामान्य रूप से माइलेज गिरने या इंजन में दिक्कत महसूस हो, तो अधिकृत सर्विस सेंटर से तुरंत जांच करानी चाहिए।

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